एक नजर इधर भी .....!!

फेसबुक, व्हाट्स-ऐप की पोस्ट देखकर और युवाओं से बात करके मुझे ऐसा लगता है कि हमारी वर्तमान युवा पीढ़ी के मन में राजनीति चकाचौंध की तरफ एक विशेष तरह का आकर्षण है एक झुकाव है जो लगातार बढ़ता ही जा रहा है मैं समझता हूँ इसमें कोई गलत बात भी नहीं है आखिर वर्तमान में ही तो भविष्य का बीज है जबकि हमारा आज बीते हुवे कल का फल |
जो लोग राजनीति में कदम बढ़ा रहे हैं बढ़ा चुके हैं या बढानें के विषय में सोंच रहे हैं उन्हें यह समझना होगा कि हमारा वर्तमान समाज ऐसा हो गया हैं जैसे सुख, सुविधा, वैभव आदि के दिखावे में लोग दिन प्रति दिन और अधिक अंधे होते जा रहे है जबकि हम और हमारा भारत हमेसा से ऐसे नहीं थे, समय के साथ धीरे धीरे विभिन्न कारणों से हमनें अपनीं और अपनें समाज की ऐसी हालत बना ली तो अब जबकि हम सभी यह महसूस कर सक्ते हैं कि बेहतर जिंदगी की तलाश में जैसे जिंदगी को ही पीछे छोड़ कर आज कोई सुखी नहीं दिखता, कम से कम अब हमें न सिर्फ उन कारणों को दोहरानें से बचना होगा जिनसे वर्तमान (समाज रुपी फल) का परिणाम आया बल्कि हमें अब खुद ही सामाजिक प्राणी होनें के नाते सजग रहकर स्वस्थ समाज के निर्माण में सक्रिय रह करअपनीं - अपनीं जिम्मेदारी निभानी होगी और स्वयं के आचरण, व्यवहार, विचार द्वारा भारत की आनें वाली पीढ़ियों के लिए सभ्य समाज व्  उसमें उनको महत्वापूर्ण भूमिका के लिए तैयार करना होगा, आखिर हम ही तो समाज के निर्माता हैं |
राजनीति समाज के लिए है न कि समाज को राजनीति के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए अतः हमें सदैव मानवीयमूल्यों और जीवन आदर्शों का पालन करना होगा राजनीति राजा बननें के लिए नहीं बल्कि सेवा के लिए है तो हमें सेवा करनीं होगी स्वयं काम करना होगा क्युंकि अब चापलूसी से काम चलनें वाला नहीं, हमें दूसरों का विश्लेषण करनें के बजाय उन्हें खुश करनें के बजाय अपनें-अपनें कर्तव्यों पर ध्यान रखना होगा और राजनीति की चालाक लोमड़ियों से खुद को बचाना भी होगा...

-जय हिन्द !

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