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Showing posts from December, 2018

*साहब रिटायर होता है!*

*साहब रिटायर होता है !* सरकारी बँगला, उसका हरा भरा लॉन, ड्राइवरों, चपरासियो के साथ बिना मांगे नमस्ते करने वालो ऑफिस के चमचों की भीड एकाएक साथ छोड जाती है ! हाँलाकि उनके जाने का द...

आखिर अंतर रह ही गया

*आखिर अंतर रह ही गया*       🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 बचपन में जब हम रेल की सवारी  करते थे, माँ घर से खाना बनाकर ले जाती थी l पर रेल में कुछ लोगों को जब खाना खरीद कर खाते देखता बड़ा मन करता हम भी खरीद...