लाइक

लाइक
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क्यों पड़े हैं इस पचड़े में
कि लाइक कोई करे हमें
जमाना लाइक जिसे करता है
वही है बुराइयों की जड़ में

जीवन की परेशानियों को सब भुगतते हैं , परेशानी का समाधान वैज्ञानिक होते हैं , जो आविष्कारों से जीवन सरलता की सामग्री निर्माण की राह प्रशस्त करते हैं।  वैज्ञानिक सँख्या में कुछ होते हैं।  जबकि आविष्कृत सामग्री का लाभ पूरी दुनिया लेती है।

इसी तरह आचरणगत समस्या सभी को होती है , जिसका निवारण धर्म /धर्म प्रवर्तकों ने दिया है।  धर्म पर चलकर उसको समझ कर मनुष्य अपना जीवन सुखद और शांत बनाता है।  धर्म  और धर्म प्रवर्तक कुछ ही हुए हैं जो मनुष्यों को लम्बी अवधि से जीवन दिशा प्रदान करते हैं।

सामाजिक बुराइयाँ और कुरीतियाँ नई नई तरह की अलग अलग काल और क्षेत्र में उत्पन्न होती रही /रहती हैं।  कुछ समाज सुधारक और युग नारी /पुरुष हमें मिलते आये हैं।  जिन्होंने अपनी विचारशीलता और सच्ची प्रेरणाओं से इन्हें मिटा कर समाज में मनुष्य-जीवन को बुराई अभिशाप से निकाला है।  सामाजिक बुराई क्या है ? यही ना जिसे ख़राब भी जानते हैं किन्तु सम्मोहनों या रुग्ण परम्पराओं के दुष्प्रभाव में सभी करते चले जाते हैं।
(रुग्ण परम्परायें - बाल विवाह , बहु विवाह (एकाधिक पत्नियाँ)  , छुआ-छूत , बँधुआ-मजदूर प्रथा ,इत्यादि।  आज दहेज़ प्रथा ,कन्या-भ्रूण हत्या , सेक्स-स्वछंदता , पोर्नोग्राफी के प्रति रुझान इत्यादि)

बुराई में ज्यादा व्यक्ति पड़ते और करते हैं।  उनको सदप्रेरणाओं से मिटाने वाले कुछ ही होते हैं जो कालांतर में महान और युग नारी /पुरुष कहे जाते हैं।  आरम्भ में उनका दर्शन , साधारण व्यक्ति की सोच और आचरण से भिन्न होने से विचित्र सा लगता है। लेकिन जब उसमें निहित भलाई का अनुभव होता है तो पूरी की पूरी पीढ़ियाँ उनका अनुशरण करती हैं।

स्पष्ट है धर्म प्रवर्तकों , वैज्ञानिकों और तथाकथित महान इस बात से निष्प्रभावित रहते हैं कि उनके लिए  कहा -सुना क्या जा रहा है।  वे अपने भले उद्देश्यों को लेकर पूरे जीवन लगे होते हैं।  उन्हें आडम्बरों और धन-वैभव कामनाओं से भी मुक्त देखा जा सकता है।

सर्वकाल भलाई के धर्म , उन्नत आविष्कार और प्रचलन में रही सामाजिक बुराइयों का विनाश इन्हीं कुछ की विचारशीलता ने ही दिए हैं।  जिसने मनुष्य सभ्यता के विकास के द्वार खोले और पथ निर्माण किये हैं।

इसलिये क्या अधिकाँश द्वारा लाइक किया जा रहा है , और हमारी अच्छी बातें क्यों लाइक और लोगों को आकर्षित,  नहीं कर पाती हैं।  इन बातों से अपने हौसले नहीं खोने चाहिये।  अपनी विचारशीलता बनाये रखें , शायद आप में से कोई नया प्रवर्तक या युग नारी /पुरुष बन उभर जाये।  जो आज की बुराईयों से हमारी पीढ़ी को अभिशाप -मुक्त करने में सफल हो।

नरेन् सोलंकी
11 लक्समी नगर पाली
9782707779

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