सुर संग्राम

आज के इस आधुनिक दौर में एक ओर जहां युवाओं में हर चीज को चुट्टकियों में निपटाने की आदत होती है, वहीं दूसरी ओर उम्रदराज लोग चीजों को करने और समझने में थोडा-सा समय लगाते हैं। बदलता वक्त हर चीज को बदल देता है। इसमें ना सिर्फ हमारे काम करने के तौर तरीके बदलते हैं, बल्कि हमारी सेाच में भी फर्क आ जाता है। इसके अलावा दो जेनरेशन के बीच और भी कई ऎसी चीजें होती हैं जो परेशानी का सबब बनती हैं। दोनों ही पीढी के लोग एक-दूसरे को ठंडे दिमाग से समझने और मिलकर काम करने की आदत डालें तो जेनरेशन गैप से होने वाली मुश्किलों को कम किया जा सकता है।

जिन्दगी के हर कदम पर नई पीढी बुजुर्गो से बहुत कुछ सीख सकती है, क्योंकि उन्हें दुनियादारी का कहीं ज्यादा अनुभव होता है। यह बात प्रोफे शनल लाइफ में ज्यादा अच्छे से लागू होती है। ऑफिस में सीनियर लोगों को अच्छी जानकारी होती है। नई पीढी इन चीजों का फायदा उठा सकती है। युवा पीढी अगर पुरानी पीढी से कुछ सीख रही है तो बदले में नई पीढी भी उन्हें कुछ सीखा सकती है। खासकर के टेक्निकल बातों पर नई उम्र के लोगों की ज्यादा पकड होती है, जबकि उम्रदराज लोगों का इन चीजों में कम ज्ञान होता है।

पुरानी पीढी के पास हर बात हर चीज का तजुर्बा अधिक होता है व लाइफ के विभिन्न पहलुओं चाहे वह पारिवारिक हों, समाज से जुडा हो या राष्ट्रहित से संबंध हो हर मुद्दे पर उनका अनुभव खासा कीमती होता है, वे विभिन्न मौके पर वास्तविकता का सामना कर चुके होते हैं, इसलिए उनमें सही-गलत भी बेहतर होती है। वहीं नई पीढी के पास अनुभव तो सीमित होता है, लेकिन उनके अन्दर नवीन तकनीक एवं प्रौद्योगिकी को आत्मसात करने की उत्सुकता गजब की होती है। इस परिस्थिति में अगर दोनों पीढी अपनी अपनी विशेषताओं को एक-दूसरे के साथ मिलाकर कार्य करने की भावना विकसित करें तो हमारे देश एवं समाज को अधिक लाभ होगा। 
अगर यंगस्टर आधुनिकता की ओर अपना रूचि दिखाते हैं तो यह मतलब कतई नहीं है कि वह मन लगा कर काम नहीं करते । कुछ चीजें एज और शौक से जुडी होती हैं। काम करने या ना करने से इनका कोई संबंध नहीं होता ऎसे में बुजुगों को चाहिए कि इस तरह की चीजों को लेकर नौजवानों को बेवजह नहीं डांटना चाहिए। 

युवाओं को लगता है कि बुजुगों को नई चीजों के बारे में बहुत कम पता है तो युवा पीढी कभी-कभी अनुभव की कमी महसूस करती है। पुरानी पीढी का अनुभव और नई पीढी का जोश कई दिक्कतों को झट से हाल किया जा सकता है। अगर किसी का काम पसंद आए तो उसकी तारीफ में बिल्कुल हिचकना नहीं चाहिए क्योंकि इससे ना सिर्फ हौसला बढता है बल्कि उसकी नजरों में आपकी इ�ात बढ जाती है। दोनों ही पीढी के लोगों को इस बाता को अमल में लाना चाहिए कि जेनरेशन गैप पाटने का यह सब से बेहतर तरीका है।

जनरेशन  गैप ” सुनने में अच्छा शब्द है ना,हर दौर में इस  बात  पर  बहस  बहुत  गर्म  रहती  हैंहमेशा  एक पीढ़ी  अपने  आपको  दूसरी  पीढ़ी से बेहतर  सिद्ध  करने के  लिए  इसी  शब्द  का  सहारा  लेती  हैं  ,चाहे  वो  सोच को  लेकर  हो ,या  काम  करने  के  तरीके  को  लेकर  हो,या  जीवन  जीने  के  तरीके  को  लेकर

जनरेशन  गैप  कह  देना  अपने  आपको  अच्छा  साबित करने  का  बढ़िया  तरीका  हैमगर  हर  कोई  ये   भूल जाते  है, कि  वो  कभी उसी  दौर  से  गुजरे थेजिससेआज  कोई और  गुजर  रहा है ,जो आदते  या यूँ कहें हरकते  उन्होंने  अपने  समय  में की थी। वही आज कोईऔर भी कर रहा है। उदाहरण के तौर पर अक्सर  हमारे बुजुर्ग “आजकल  आजकल ” कहकर  कोसते  रहते  हैं  जैसे  आजकल  के  गानो  तथा  उनकी  भाषा  पर उनकी  नाराज़गी  बेहद  ज्यादा  हैकहते  हैं  कैसा  गाना है  “चार  बोतल  वोटका  काम  मेरा  रोज़  का ” पर  वो ये  भूल  जाते  हैंकुछ  30-40 साल  पहले  जब  वो जवान   हुआ  करते  थे,वो  भी  कुछ  इसी  प्रकार   के गानो  पर  झूमा करते  थे । बस  शब्द  अलग  थे  मतलब उस  समय  रैप गाने ना होकर गाने बेहद सुरीले  हुआकरते थे जैसे “थोड़ी सी जो पीली  है ,चोरी  तो  नहीं  की है ”या  “दे दादा  मेरे भईया रे दे दारू” और  इन्ही  गानो को  सुनकर  उनके  बुजुर्ग  भी  उन्हें डांटा करते  थे .लोग अक्सर  कहते  जमाना  बदल  गया ,पर  जरा याद कीजियेपहले बॉयफ्रेंड और गर्लफ्रेंड मिलने के लिए  पार्क  मेंजाया करते  थे बस आजकल तरीका  बदला  है ,गर्लफ्रेंडऔर बॉयफ्रेंड फेसबुक पर poke और skype पर  चैट करते  हैं

हम अक्सर दौर और उम्र को दोष देते हैं ,पर येनज़रअंदाज़ कर देते  हैं कि  हर  उम्र  का  अपना  जोशऔर  मज़ा  होता  है साल  बदल  जाते हैं एक  पीढ़ी  के बाद  दूसरी  पीढ़ी आ जाती  है ,कुछ  भी  ना  ही  बदला था ना ही   बदलता  हैं , बस बदलता है तो उसे  व्यक्तकरने का तरीका सब अपनी जगह  सही  होते  हैं, और जो  चीज  गलत  थी  वो  हमेशा  गलत  होती  है .बस नज़रिये  की  बात  है

यंग  जनरेशन  भी  अपने  बड़े  बुजुर्गों  को  कई  मामलों में  कोसने  से  नहीं  चूकती  यंग जनरेशन को कुछ करनेपर यदि पेरेंट्स या बुजुर्ग कुछ कहें तो कहते हैं “इसजनरेशन को ये सब समझ  में नहीं आता”पर याद रखियेआप जिस स्कूल की नरसरी में हैं वो उस से पीएचडी करचुके हैंऔर एक अनुभवी प्रोफेसर हैं तो उन्हें कोसने कीजगह उनसे बात करके उनके अनुभव का लाभ लें

जनरेशन गैप जैसा कोई शब्द नहीं होता है ये सिर्फ हमारीकमी  और गलती को छुपाने के लिए उपयोग किया जानेवाला अल्पबुद्धि से उपजा शब्द है तो आज से इस“जनरेशन  गैप ” शब्द को खत्म कीजिये और "जनरेशनब्रिजिंग "की शुरुआत करें किसी भी काम में यंग जनरेशनकी शुरुआत के साथ यदि बुजुर्गों का अनुभव जुड़  जाये तो सफलता  100% ही नहीं 1000% मिलती  है,उसीप्रकार से बुजुर्गों को भी याद रखना  चाहिए  की"आजकल" या "आज कल की पीढ़ी" जैसे शब्दों  कोबोलकर  कोसने की जगह उनके साथ मिलकर  खुश  रहेंऔर उन्हें अपने अनुभव बाँटें देखिएगा मज़ा जरूरआएगा


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