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सोशल मीडिया

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मायमाय नर्सिंग फ्रेंड विजु धौलपुर _________ ,____________________________________ सोशल मीडिया के इस युग में पूरी दुनिया के तमाम लोगों तक पहुंचने और उनसे जुड़ने की संभावना पहले से कई गुना बढ़ गयी है। सिर्फ एक बटन दबा कर मित्रों को अपने पास कर लीजिए, ट्वीट के जरिये उनको अपने नये-नये समाचार दे दीजिए या अपने ब्लॉग पर दूसरों की राय फटाफट जान लीजिए। अब नेटवर्किंग यानी मेलजोल का दायरा बढ़ाने के विकल्प लगभग असीमित हैं। हमारे ‘वर्चुअल’ यानी परोक्ष मित्रों और ‘फॉलोअर्स’ की संख्या जैसे-जैसे बढ़ रही है, क्या आपके मन में कभी यह सवाल उठा है कि इनमें से वास्तव  में कितना सही है? आपके लिए मित्रता  क्या मायने रखती है? मैं समझता हूं कि किसी भी चीज से गहराई से जुड़ने की क्षमता मुझमे रही है। – चाहे वो पेड़ हो या स्थान, जमीन हो या चट्टान या फिर इंसान – जिससे भी जुड़ा गहराई से जुड़ा। मेरी ये योग्यता कई मायनों में वह कुंजी रही है जिसने जीवन और प्रकृति के नये पहलुओं को मेरे सामने खोला  है। स्कूल में दाखिले के बाद, तीन या चार साल की उम्र में मैंने अपना पहला मित्र बनाया। मेरा उसके सा...

#नोटबन्दी को 9वां महीना चल रहा है😃 #विकास कभी भी पैदा हो सकता है😎😂

सरकारी नौकरी..!???

प्राइवेट काम करने वालों को लगता है कि सरकारी कर्मचारी को तो फोकट की तन्ख्वाह मिलती है। एक वैल्डिन्ग मिस्त्री काफी दिनों से एक सरकारी कर्मचारी को तन्ख्वाह ज्यादा होने ,व क...

गावो विश्वस्य मातरः

गावो विश्वस्य मातरः आज भारत वर्ष मे ही नहीं पूरे विश्व मे सभी मानव सुखी है पर जीव मात्र की माता कहलाने का अधिकार रखने वाली वेदों द्वारा पूज्यनीय, देवताओं को भी भोग और मोक्ष प्रदान करने की शक्ति रखने वाली गौ माता आज सड़कों पर मल, गन्दगी, प्लास्टिक खाने को मजबूर है | भगवान श्री कृष्ण की कृपा से आज भी भारत वर्ष मे ही नहीं पूरे विश्व मे कुछ ऐसे पुण्यवान, भामाशाह और अपनी माँ के कोख को धन्य करने वाले गौ भक्त भी है, जिनके सहयोग से आज भी लाखो गौवंश गौशालाओं मे, किसानों के यहाँ, अपने घर पर ही सुरक्षित है | क्या ये गौभक्त, जिनकी वजह से पूरी सृष्टी का संतुलन बना हुआ है, आगे भी इसी प्रकार गौ – सेवा में संलग्न रह सकेंगे ? शेष मानव जाति को जिनको परमात्मा ने सोचने के लिए बुद्धि दे रखी है का भी कर्तव्य बनता है कि इस गो संवर्धन को उठाने मे, इस राम सेतु को बनाने मे ग्वाल - बालो एवं गिलहरी की तरह थोडा – थोडा यथा योग्य योगदान दे | जब हम थोडा-थोडा योगदान देंगे तो हम सभी गौभक्तों के लिए कुछ भी दुर्लभ नहीं रहेगा | शास्त्र कहता है — गौ भक्त जिस-जिस वस्तु की इच्छा करता है वह सब उसे प्राप्त...

समाज का बेड़ा गर्क, किसने किया किसने किया

"समाज का बेड़ा, गर्क किसने किया है""🙇🙇         सच बताऊ तो, आपको आश्चर्य होगा कि, यह वही लोग है जिन्हे आप मानते है कि, उन्होने केवल अपना, अपने बीवी, बच्चों का विकास किया है, वे ही समाज का बेड़ा गरक करने मे, सबसे आगे है।         बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने 20 जुलाई 1952 मे विधार्थियों से अपेक्षा करते हुए कहा था कि ‘‘सामाजिक उतरदायित्व निभाने वाले विधार्थी समाज मे तैयार करने के उद्देश्य से मैंने सिद्वार्थ कॉलेज का निर्माण किया, लेकिन अनुभव बहुत कड़वा हुआ है। शिक्षा होने के बाद अच्छी नौकरी मिल गयी, बस हो गया अपना काम, इस संकुचित मानसिकता की वजह से वे भूल जाते है कि मैं कौन हॅॅू? मुझे शिक्षा किसने दी? उन्होंने कितना कष्ट सहन किया? इसकी जानकारी न रखकर, ये अपने समाज को भूल जाते है। ऐसे लोगों को क्या कहना चाहिए? समाज के विधार्थी पढ़-लिखकर समाज की तरफ देखते ही नहीं, यह समाज के साथ विश्वासघात नहीं तो और क्या हैं? मैंने अपना सारा जीवन आप लोगों के लिए लगाया है। मेरे मरने के बाद इस समाज का क्या होगा? यह चिन्ता दुर हो, ऐसी अपेक्षा के मुताबिक, अगर आप कार...

विवाह शादी मैरिज ???''

विवाह शादी मैरिज  ?????? आश्चर्य की बात है की हम लोग शास्त्रो को सम्मान देते हुए भी उनमे कही हुई बात प्रैक्टिकल रूप मे नही मानते, शास्त्रो मे आठ प्रकार के विवाह का वर्णन है ब्राह्म, दैव, आर्य, प्राजापत्य, आसुरी, गान्धर्व, राक्षसी, पैशाचिक || इनमे सर्वोत्तम ब्राह्म विवाह है यह विवाह आज के विवाह से सर्वथा भिन्न है इसका ज्ञान न होने के कारण ही आज कल के माता पिता वासना युक्त विवाह करा रहे है| शास्त्रानुसार "यदि कोई मनुष्य धन के लोभ मे अपनी कन्या किसी नीच को , वृद्ध नर को या कुरूप को या खराब चरित्र वाले नर को देता है तो वह मरने के बाद प्रेत बनेगा " अब अगर देखा जाय तो कन्या के माता-पिता जब लडका देखते है तो उसमे क्या देखते ? कितना कमाता है , कितना बैक बैलेंस है कार फ्लैट है बिमार माँ-बाप तो नही या परिवार से अलग रहेगा ??? और लडके वाले सगाई तय करने से पहले दहेज मे कैश वाहन घरेलू सामान तय करते है फिर आगे बढेगे !  कौन ऐसी कन्या या ऐसा बालक है जिसे धन की लिप्सा नही रहती ?? शास्त्रो मे ऐसे विवाह को, जिसमे धन-द्रव्य इत्यादि का लालच किया जाय और शील पवित्रता न देखी जाय , 'आसुरी विवाह...

लिव इन रिलेशनशिप की प्राचीन परंपरा भाग 2

सीरवी संदेश पत्रिका में प्रकाशित लेख लिव इन रिलेशनशिप की प्राचीन परंपरा भाग-2वी समाज-नाथा प्रथा का बढ़ता दुरूपयोग (लिव इन रिलेशनशिप की एक प्राचीन परंपरा) ( भाग 2) कैसे मंज़र सामने आने लगे हैं गाते-गाते लोग चिल्लाने लगे हैं अब तो इस तालाब का पानी बदल दो ये कँवल के फूल कुम्हलाने लगे है पिछले लेख में मैंने लिखा था कि लिव इन रिलेशनशिप सीरवी समाज में हमेशा चर्चा का विषय रहा है। सामाजिक रूप से इसे आज भी स्वीकार नहीं किया जाता है। स्त्री का शादी के बगैर पुरुष के साथ रहना सामाजिक दृष्टि से पाप समझा जाता है। घर-परिवार और समाज में लिव इन रिलेशनशिप की बात उठाते ही इसे पश्चिमी देशों की नकल कह कर दरकिनार कर दिया जाता है। सीरवी समाज का समाजिक ढांचा आज भी यहीं मानता है  कि जोड़ियां स्वर्ग से बनकर आती हैं। समाज में गहरी जड़ें जमा चुका यह बह्म सत्य शायद ही कभी टूट पाए! लेकिन, आपको यह जानकर हैरानी होगी कि सीरवी समाज में लिव इन रिलेशनशिप( सहजीवन) से मिलती-जुलती परंपरा काफी पुराने वक्त से चली आ रही है। यह आज भी उसी रूप में समाज में विद्यमान है। लिव इन रिलेशनशिप से मिलने-जुलने वाली यह पर...