(((((आइए, कुछ सोचें और अपने सीरवी समाज पर बात करें। ))))
20 feb 2018
11:30 am
(आइए, कुछ सोचें और अपने सीरवी समाज पर बात करें। )
हम रोज हमारे समाज की परेशानियों के बारे में सोचते हैं और फिर कोई समाधान न निकलता देख एक एक उनको ठंडे बस्ते में डाल देते हैं..
जो हमारे पुराने समाज की समस्याएं रही हैं उनको हमलोगों ने जब सही से एड्रेस नहीं किया तो आज हमें अलग तरह की सामाजिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा हैं..
और ये जो issues हैं ये कोई आसमानी issues नहीं हैं ये वहीं issues हैं जो आप और हम लोग चाय की थड़ी पर, खाली बैठे होने पर, सड़क किनारे लोगो की अव्यवस्थित हालात से या फिर अखबार में कुछ पढ़कर इनपे चर्चा करना आम बात हैं..
इनमें से कुछ, समाज की हकीकत- धर्म, पितृसत्ता (सारी शक्ति पुरुषों के पास होना), हिंसा (लड़ाई झगड़ा और मारपीट), निरक्षरता , अदला बदली की प्रथा, दहेज प्रथा, मृत्यु भोज,अफीम मनवार की प्रथा है।
दूसरी और, इसके विपरीत हम सब के भीतर एक आदर्श समाज का सपना भी है जो हमें नामुमकिन लगता है..
ऊपर लिखी सारी बातें कहने सुनने के हिसाब से अच्छी लग रही हैं.. नहीं ??
ये सवाल तो हमारे सब के मन में उठता हैं तो लेकिन जवाब ये ही एक आता हैं कि मेरे अकेले से क्या होगा..
अकेले से जब नहीं होगा तो क्यों ना फिर हमको मिलकर,
जो भी हमारे क्षेत्र में हमसे बने, वह करना चाहिए..
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